राष्ट्पति शक्तिया

राष्ट्पति की शक्तिया अनुच्छेद

Thursday, July 8, 2021

News

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Saturday, March 28, 2020

व्दिगु समाज

व्दिगु समाज का पहला पद संख्यावाचक विशेषण होता है ओर सम्पूर्ण पद समूह का बोध होता है । अन्य अर्थ का नहीं । 2.इसका विर्गह करने पर समूह या समाहार शब्द र्पयुक्त होता है । 3.बहुर्वीहि समाज में भी कभी -कभी पहला पद संख्या वाचक होता हैं किन्तु समस्त पद वहाँ समूह का बोध नहीं कराता । उदाहरण - एकांकी , सप्तर्षि , इकठट्ठा , इकलोता पंचवटी आदि ॥

Thursday, March 26, 2020

कर्मधारय समास

1.कर्मधारय समास में दूसरे पद की र्पधानता होती है ॥ 2.कर्मधारय समास में एक पद विशेषण तथा दूसरा विशेष्य या उपमान-उपमेय संबंध रहता है ॥ 3.कर्मधारय समास जहा उपमा व रूपक अंलकार होते है ॥वहाँ होता है ।विर्गह करने पर ,रूपी,शब्द भी र्पयुक्त होता है ॥ 4 कर्मधारय समास में एक पद विशेषण होता है ॥ उदाहरण- मंदबुध्दि , नीलकमल सुमति कुपुत्र आदि ॥

Wednesday, March 25, 2020

तत्पुरूष समाज

तत्पुरूष समाज -1.दूसरा पद र्पधान होता है ॥ 2.पहला पद विशेशण होता है ॥ 3.तत्पुरूष समाज के छ: रूप होते है ॥ कर्म तत्पुरूष ,करण तत्पुरूष ,सम्पृदान तत्पुरूष ,अपादान तत्पुरूष ,सम्बन्ध तत्पुरूष ,अधिकरण तत्पुरूष समाज ॥उदाहरण-यशर्पाप्त रसभरी विधालय पापमुक्त भूंकप नराधम अर्धम ॥

Tuesday, March 24, 2020

अव्ययीभाव समाज

1.पहला पद र्पधान होता है ॥ 2.पहला पद अव्यय होता है ॥ 3 एक शब्द कि पुत्नरार्वती होती है । 4.समस्त पद र्किया-विशेषण का काम करता है ॥ 5 पहला पद उपसर्ग होता है ॥ जैसे-यथाशक्ति ,रात-दिन , र्पतिवर्ष आदि ॥

Monday, March 23, 2020

समाज हिन्दी व्याकरण

समाज का अर्थ -दो या दो अधिक शब्दो के मेल को समाज कहते है । समाज के र्पकार - 1.अविभाव समाज 2.तत्पुरूष समाज 3.व्दिगु समाज 4.दुन्द समाज 5.कर्मधारिय समाज 6.नन्न समाज

हनुमान वर्त कथा

भारत शासन अधिनियम 1909,1919,1935

1909 का मारत परिषद् अधिनियम:- यह भारत के संवैधानिक विकास की दिशा में अगला कदम था। इसके जन्मदाता भारत सचिव मार्ले तथा गर्वनर जनरल लार्ड मि...

राष्टपति की शक्तिया