राष्ट्पति शक्तिया
राष्ट्पति की शक्तिया अनुच्छेद
Friday, February 7, 2020
हनुमान वर्त कथा भाग 2
कुछ समय बाद बार्मण वन से घर आया । उसने उस बालक देखकर कहा यह बालक किसका है । तो बार्मणी ने वर्त वाली सारी बात बता दी । पत्नी कि बात छल से भरी मानकर बार्मण ने सोचा कि यह वेभचारणी अपना पाप छिपाने के लिए यह सब बोल रही है । एक दिन बार्मण नहाने कुँए पर जा रहा था तो बार्मणी कहा मगंल उसका पुत्र को भी साथ ले जाओ । बार्मण मगंल को ले गया और उसे कुँए मे डालकर वापस आ गया ।घर आया तो बार्मणी पूछा कि मगंल कहा है । इतने मगंल मुश्कराता घर आ गया । बार्मण यह देखकर आशचर्य मे पड गया । उसी रात हनुमान जी ने उसे सपने में दर्शन देकर कहा कि यह पुत्र तुमको मेने दिया है । तुम पत्नी को क्यो लडते हो । यह सुनकर बार्मण खुश हुआ । दोनो पती पत्नी खुशी से रहने लगे ॥ बोलो जय श्रीराम बोलो जय श्री हनुमान
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