राष्ट्पति शक्तिया

राष्ट्पति की शक्तिया अनुच्छेद

Friday, February 7, 2020

हनुमान वर्त कथा

एक गाँव में दोनो बार्मण बार्मणी रहते थे । उनके पुत्र नही था । एक दिन बार्मण पुजा हेतु वन में चला गया । बार्मणी घर पर मगंलवार का वर्त करती थी । एक दिन कोई वर्त आ गया बार्मणी हनुमान जी के भोग लगाना बुल गयी ।उसने सोचा कि अगले मगंलवार को भोग लगाकर भोजन करूगी । वह 6 दिन भूखी रही 7 दिन मगंलवार को तो उसे मूर्छा आ गयी । उसकी लगन को देखकर हनुमान जी उसपर पर्शन्न हो गयें । ओर उसे दर्शन देकर उसे पुत्र का वरदान देकर अन्तर्धान हो गये । कुछ समय बाद बार्मणी ने एक पुत्र को जन्म दिया ।

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