राष्ट्पति शक्तिया

राष्ट्पति की शक्तिया अनुच्छेद

Friday, February 28, 2020

राजस्थान के मेले

ऊँट महोत्सव-बीकानेर,मरू महोत्सव-जैलमेर,हाथी महोत्सव-जयपुर,मेवाङ महोत्सव-उदयपुर,र्गीष्म महोत्सव-माउन्ट आबू मारवाङ महोत्सव-जोधपुर शेखावाटी महोत्सव-सीकर झुंझुनू चुरू शरद महोत्सव-माउन्ट आबू शेष अगली पोस्ट में ॥

Thursday, February 27, 2020

Friday, February 21, 2020

राजस्थान का सांराश

राज‌+स्थान अर्थात् राजाऔ का स्थान । जिसे राजपुतान भी कहते है इसे कर्नल जेम्स टौड ने रायस्थान कहा है ॥

Thursday, February 20, 2020

Wednesday, February 19, 2020

राष्ट्पती कि शक्तिया

1 शान्तीकालीन शक्तिया 53-74 2-विधायी शक्तिया 85-87-108-80 , 3-आध्यादेश जारी करने की शक्तिया 123 , 4-विटो शक्तिया 74 , 5 वितीय शक्तिया -280 ,6 न्यायिक शक्तिया 124 143 72 , 7-आपातकालीन शक्तिया 352 356 360 ॥

Rpsc.news

Tuesday, February 18, 2020

Saturday, February 15, 2020

LDC RUSLTH

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Wednesday, February 12, 2020

Tuesday, February 11, 2020

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Saturday, February 8, 2020

REET EVERANMENT BOOK


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रिट का सेलेबस

1.लेगवेज हिन्दी 2.सेकेण्ड लेगवेज संस्र्कत 3.मनोविग्यान 4.गणित 5.पर्यावरण ॥ 5 विषय् का सेलेबस है । पत्र्येक विषय से 30 र्पशन आएगें । कुल पूर्णाक 150 का होगा ।

Friday, February 7, 2020

हनुमान वर्त कथा भाग 2

कुछ समय बाद बार्मण वन से घर आया । उसने उस बालक देखकर कहा यह बालक किसका है । तो बार्मणी ने वर्त वाली सारी बात बता दी । पत्नी कि बात छल से भरी मानकर बार्मण ने सोचा कि यह वेभचारणी अपना पाप छिपाने के लिए यह सब बोल रही है । एक दिन बार्मण नहाने कुँए पर जा रहा था तो बार्मणी कहा मगंल उसका पुत्र को भी साथ ले जाओ । बार्मण मगंल को ले गया और उसे कुँए मे डालकर वापस आ गया ।घर आया तो बार्मणी पूछा कि मगंल कहा है । इतने मगंल मुश्कराता घर आ गया । बार्मण यह देखकर आशचर्य मे पड गया । उसी रात हनुमान जी ने उसे सपने में दर्शन देकर कहा कि यह पुत्र तुमको मेने दिया है । तुम पत्नी को क्यो लडते हो । यह सुनकर बार्मण खुश हुआ । दोनो पती पत्नी खुशी से रहने लगे ॥ बोलो जय श्रीराम बोलो जय श्री हनुमान

हनुमान वर्त कथा

एक गाँव में दोनो बार्मण बार्मणी रहते थे । उनके पुत्र नही था । एक दिन बार्मण पुजा हेतु वन में चला गया । बार्मणी घर पर मगंलवार का वर्त करती थी । एक दिन कोई वर्त आ गया बार्मणी हनुमान जी के भोग लगाना बुल गयी ।उसने सोचा कि अगले मगंलवार को भोग लगाकर भोजन करूगी । वह 6 दिन भूखी रही 7 दिन मगंलवार को तो उसे मूर्छा आ गयी । उसकी लगन को देखकर हनुमान जी उसपर पर्शन्न हो गयें । ओर उसे दर्शन देकर उसे पुत्र का वरदान देकर अन्तर्धान हो गये । कुछ समय बाद बार्मणी ने एक पुत्र को जन्म दिया ।

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हनुमान वर्त कथा

भारत शासन अधिनियम 1909,1919,1935

1909 का मारत परिषद् अधिनियम:- यह भारत के संवैधानिक विकास की दिशा में अगला कदम था। इसके जन्मदाता भारत सचिव मार्ले तथा गर्वनर जनरल लार्ड मि...

राष्टपति की शक्तिया