राष्ट्पति शक्तिया
राष्ट्पति की शक्तिया अनुच्छेद
Friday, March 18, 2022
भारत शासन अधिनियम 1909,1919,1935
1909 का मारत परिषद् अधिनियम:-
यह भारत के संवैधानिक विकास की दिशा में अगला
कदम था। इसके जन्मदाता भारत सचिव मार्ले तथा गर्वनर
जनरल लार्ड मिन्टो थे। इस अधिनियम को मार्ले-मिन्टो सुधार
के नाम से जाना जाता है। जिसके तहत् भारतीय परिषद्
अधिनियम 1909, मार्ले-मिन्टो सुधार के नाम से पारित किया
गया। इस अधिनियम द्वारा मुसलमानों के लिए पृथक
मताधिकार तथा पृथक निर्वाचन क्षेत्रों की स्थापना की गई।
माले
मिन्टो
इसी कारण मार्ले और मिन्टो को साम्प्रदायिक निर्वाचन पद्धति का जन्मदाता कहा जाता है। भारत में शासन
करने हेतु अंग्रेजों ने 'फूट डालो राज करो' की नीति अपनाई।
1919 का भारत सरकार अधिनियम:-
इस अधिनियम द्वारा प्रान्तों में लागू की गई शासन व्यवस्था को द्वैध या दोहरा शासन कहते
हैं। अब प्रान्तों में आंशिक उत्तरदायी सरकार की स्थापना हो गई।
इस अधिनियम को लागू कर ब्रिटिश सरकार यह चाहती थी कि भारत के एक प्रभावशाली
वर्ग को अपना समर्थक बना लिया जाए। भारत सचिव को भारत सरकार से जो वेतन मिलता था, इस
अधिनियम द्वारा अब वह अंग्रेजी कोष से मिलना तय किया गया। विषयों को निम्नांकित रूप से केन्द्र तथा
प्रान्तों में बाँट दिया गया।
केन्द्रीय सूची के मुख्य विषय :- विदेशी मामले, रक्षा, डाक, तार, सार्वजनिक ऋण आदि।
प्रान्तीय सूची के मुख्य विषय :- स्थानीय स्वशासन, शिक्षा, चिकित्सा, भूमिकर, अकाल सहायता,
कृषि व्यवस्था आदि । इस अधिनियम को माण्टेग्यू चैम्स फोर्ड सुधार के नाम से जाना जाता है।
1935 का भारत शासन अधिनियम:-
इस अधिनियम द्वारा भारत में सर्वप्रथम संघात्मक सरकार की स्थापना की गई। प्रान्तों में
लागू द्वैध शासन को समाप्त कर दिया गया साथ ही केन्द्र में वैध शासन को लागू कर दिया गया। इस
अधिनियम के द्वारा एक संघीय न्यायालय की स्थापना की गई। इस अधिनियम के तहत बर्मा को भारत से
पृथक कर दिया गया। केन्द्रीय सरकार की कार्यकारिणी पर गर्वनर जनरल का नियन्त्रण था। केन्द्रीय विधान
मण्डल में दो सदन थेराज्य सभा- इसे उच्च सदन कहा गया, यह एक स्थाई संस्था थी। राज्य सभा में कुल 260 सदस्यों
का प्रावधान था। इनमें से 104 सदस्य देशी रियासतों से तथा शेष 156 प्रतिनिधि ब्रिटिश प्रान्तों के
थे। जिनमें से 1/3 सदस्य प्रति तीन वर्ष बाद अवकाश ग्रहण कर लेते थे और उनकी जगह नए सदस्य आ जाते हे ।
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हनुमान वर्त कथा
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